48 laws of power|शक्ति के 48 नियम |Book Reading online

नियम 1 

कभी बॉस से श्रेष्ठ न दिखें

अपने से वरिष्ठ लोगों को यह महसूस करने दे कि वे आपसे श्रेष्ठ हैं। उन्हें खुश और प्रभावित करने के लिए अपनी योग्यताओं का ज़रूरत से ज़्यादा प्रदर्शन न करें। अगर आप ऐसा करेंगे, तो परिणाम ठीक उलटा होगा वे भयभीत और असुरक्षित महसूस करेंगे। इसके बजाय अगर आप अपने बॉस को ज़्यादा प्रतिभाशाली बताते रहेंगे, तो आप बुलंदियों को छू लेंगे।

नियम 2

मित्रों पर कभी ज़्यादा भरोसा न करें, शत्रुओं से काम लेना सीखें

मित्रों से सावधान रहें। मित्र बहुत जल्दी से ईर्ष्या करने लगते हैं, इसलिए वे आपको बहुत जल्दी धोखा भी देंगे। मित्र भविष्य में कष्ट का कारण बन सकते हैं। इसके बजाय अगर आप किसी पुराने शत्रु को काम पर रखेंगे, तो वह मित्र से ज़्यादा वफ़ादार होगा, क्योंकि उसे बहुत कुछ साबित करना है। दरअसल आपको शत्रुओं से नहीं, बल्कि मित्रों से डरना चाहिए। अगर आपका कोई शत्रु नहीं है, तो शत्रु बनाने के तरीके खोजें।

नियम 3

पने इरादे छिपाकर रखें

आप किस उद्देश्य से काम कर रहे हैं, यह ज़ाहिर न होने दें। इससे लोग अंधेरे में रहेंगे और अपनी योजना नहीं बना पाएंगे। अगर उन्हें इस बात का अंदाज़ा ही नहीं होगा कि आप क्या करना चाहते हैं, तो वे अपनी रक्षा की योजना नहीं बना सकते। इस तरह आप उन्हें ग़लत दिशा में काफ़ी दूर तक ले जा सकते हैं और काफ़ी समय तक गुमराह कर सकते हैं। जब तक उन्हें आपके इरादों का एहसास होगा, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

नियम 4

हमेशा ज़रूरत से कम बोलें

लोगों को शब्दों से प्रभावित करने की कोशिश न करें। आप जितना ज़्यादा बोलेंगे, उतने ही ज़्यादा साधारण नजर आएँगे और आपका नियंत्रण उतना ही कम होगा। अगर आप अपनी बात को अस्पष्ट, गोलमोल और अजीब रखेंगे, तो आपकी नीरस बात भी मौलिक लगेगी। सशक्त लोग कम बोलकर प्रभावित करते हैं और रौबदार दिखते हैं। इस बात की ज़्यादा संभावना होती है कि ज़्यादा बोलते समय आपके मुँह से कोई न कोई मूर्खतापूर्ण बात निकल ही जाएगी।

नियम 5

प्रतिष्ठा पर बहुत कुछ निर्भर करता है- हर क़ीमत पर इसकी रक्षा करें

प्रतिष्ठा शक्ति की नींव है। सिर्फ़ प्रतिष्ठा के माध्यम से ही आप दबदबा कायम कर सकते हैं और विजय पा सकते हैं। एक बार भी फिसल जाने पर आप असुरक्षित हो जाएंगे और आप पर सभी दिशाओं से हमला होने लगेगा। ऐसी प्रतिष्ठा बनाएं कि उस पर कोई हमला न कर सके। हमेशा संभावित हमलों के बारे में सचेत रहें और उनके होने से पहले ही उन्हें ख़त्म कर दें। इस दौरान अपने शत्रुओं की प्रतिष्ठा में सेंध लगाकर उन्हें नष्ट करना सीखें। फिर दूर खड़े हो जाएं और जनता को उनकी आलोचना करने दें।

नियम 6

हर क़ीमत पर सबका ध्यान आकर्षित करें

हर चीज़ का मूल्यांकन दिखने के आधार पर किया जाता है। जो नज़र नहीं आता है, उसका कोई मूल्य ही नहीं होता है। इसलिए भीड़ का हिस्सा न बनें और गुमनामी में दफ़न होकर न रहें। सबसे अलग हटकर दिखें। हर क़ीमत पर लोगों की नजरों में रहें। नीरस और भीरु जनता से ज़्यादा महान, ज़्यादा दिलचस्प और ज़्यादा रहस्यमय दिखकर ऐसा चुंबक बन जाएँ, जो सबका ध्यान अपनी तरफ़ खींचे।

नियम 7

काम दूसरों से करवाएँ, लेकिन श्रेय खुद लें

अपने लक्ष्यों तक पहुँचने के लिए दूसरों की समझदारी, ज्ञान और मेहनत का इस्तेमाल करें। इस तरह से आप न सिर्फ अपना बहुमूल्य समय और ऊर्जा बचाएँगे, बल्कि इससे यह छवि भी बनेगी कि आप बहुत कार्यकुशल और तीव्र हैं। लोग आपको याद रखेंगे और आपके सहायक गुमनामी के अंधेरे में खोकर रह जाएंगे। दूसरों से जो काम करवा सकते हों, उसे खुद कभी न करें।

नियम 8

दूसरों को अपने पास बुलाएँ - ज़रूरत पड़ने पर दाना भी डालें

जब आप दूसरे व्यक्ति को कोई काम करने के लिए मजबूर करते हैं, तो नियंत्रण आपके हाथ में होता है। हमेशा ज़्यादा अच्छा यही होता है कि आपका विरोधी आपके पास आए और इस प्रक्रिया में अपनी योजनाएँ छोड़ दे। बहुत बड़ा प्रलोभन देकर उसे ललचाएँ - फिर उस पर हमला कर दें। तुरुप के सारे पत्ते आपके हाथ में होते हैं।

नियम 9

बहस से नहीं, अपने कामों से जीते

बहस से मिलने वाली क्षणिक विजय दरअसल खोखली होती है। इससे सामने वाले के विचार नहीं बदलते हैं। इसके बजाय उसके मन में द्वेश और दुर्भावना उत्पन्न होती है, जो काफ़ी समय तक़ कायम रहती है। कुछ बोले बिना अपने कार्यों से दूसरों को प्रभावित करना बहुत ज़्यादा असरदार होता है। बोलें नहीं, बल्कि काम करके दिखा दें।

नियम 10

संक्रमण : दुखी और बदक़िस्मत लोगों से बचें

आप किसी दूसरे के दुख से मर सकते हैं भावनात्मक अवस्थाएँ बिमारियों की तरह ही संक्रामक होती हैं। हो सकता है आपको लगे कि आप डूबते आदमी की मदद कर रहे हैं, लेकिन यह याद रखें कि ऐसा करके आप सिर्फ़ अपनी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। बदक़िस्मत लोग बदक़िस्मती को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। अगर आप उनकी मदद करेंगे, तो बदक़िस्मती आपकी तरफ़ भी आकर्षित हो जाएगी। इसलिए सुखी और खुशक़िस्मत लोगों के साथ रहें।

नियम 11

लोगों को अपने पर निर्भर बनाना सीखें

अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए आपको ऐसा बनना चाहिए, ताकि लोगों को हमेशा आपकी ज़रूरत पड़े और वे आपको चाहें। आप पर जितना ज़्यादा भरोसा किया जाएगा, आपके पास उतनी ही ज़्यादा स्वतंत्रता होगी। कुछ ऐसा करें, ताकि दूसरे अपनी सुख-समृद्ध के लिए आप पर निर्भर बन जाएँ। ऐसा करने के बाद आपको किसी चीज़ का डर नहीं रहेगा। लोगों को इतना न सिखाएँ कि आपके बिना उनका काम चल जाए।

नियम 12

शिकार को निरस्त्र करने के लिए थोड़ी सी ईमानदारी और उदारता का इस्तेमाल करें

एक सच्चा और ईमानदार क़दम बेईमानी के दर्जनों क़दमों को ढक लेगा। संदेह करने वाले लोगों के रक्षाकवच आपकी ईमानदारी और उदारता के कामों से शिथिल हो जाते हैं। जब आपकी थोड़ी सी ईमानदारी उनके कवच में छेद कर दे, तो इसके बाद आप उन्हें इच्छानुसार धोखा दे सकते हैं और उनसे मतलब निकाल सकते हैं। सही समय पर दिया गया उपहार यानी ट्रोजन हॉर्स भी इसी उद्देश्य को पूरा करता है।

नियम 13

मदद माँगते समय दया या कृतज्ञता की नहीं, बल्कि स्वार्थ की दुहाई दें

अगर आपको किसी साथी की मदद चाहिए, तो उसे यह याद न दिलाएँ कि आपने पहले उसकी कितनी मदद की है या उसके लिए कितने अच्छे काम किए हैं। अगर आप ऐसा करेंगे, तो वह आपको नज़रअंदाज़ करने का कोई न कोई तरीक़ा खोज ही लेगा। इसके बजाय अपने आग्रह में किसी ऐसी चीज़ की तरफ़ इशारा कर दें, जिससे उसे लाभ होगा। इस लाभ को बढ़ा-चढ़ाकर ज़ोर-शोर से बताएँ। जब उसे यह लगेगा कि आपकी मदद करने के कारण उसका भला हो सकता है, तो वह पूरे उत्साह से आपकी मदद करेगा।

नियम 14

मित्र की तरह दिखें, लेकिन काम जासूस की तरह करें

अपने प्रतिद्वंद्वी के बारे में जानना बहुत महत्वपूर्ण है। बहुमूल्य जानकारी इक‌ट्ठी करने के लिए जासूसों का इस्तेमाल करें, ताकि आप एक क़दम आगे रह सकें। इससे भी अच्छा तरीका यह है कि आप खुद जासूस की भूमिका निभाएँ। सौहार्दपूर्ण सामाजिक मुलाक़ातों में यह काम करना सीखें। अप्रत्यक्ष सवाल पूछें, ताकि लोग अपनी कमजोरियों और इरादों को उजागर कर दें। चतुर जासूसों के लिए इस बात का अवसर हर जगह और हर समय होता है।

नियम 15

अपने दुश्मन को पूरी तरह से मिटा दें

Moses से लेकर आज तक के सभी महान लीडर्स जानते हैं कि जिस शत्रु से भय हो, उसे पूरी तरह से कुचल देना चाहिए। (कई बार उन्होंने यह सबक़ कष्ट उठाकर सीखा था।) अगर एक भी चिंगारी बची रही, तो चाहे यह कितनी ही मद्धिम हो, अंततः आग भड़क उठेगी। शत्रु को पूरी तरह मिटाने के बजाय आधा कुचलने से बहुत नुकसान होता है। शत्रु फिर से शक्तिशाली बन जाएगा और प्रतिशोध लेगा। उसे पूरी तरह कुचल डालो, शरीर से ही नहीं, बलि आत्मा से भी।

नियम 16

सम्मान पाने के लिए दूरी बनाएँ

कहीं भी बहुत ज़्यादा आने-जाने से क़ीमत घटती है। आप ज़्यादा दिखते और बोलते हैं, आप उतने ही साधारण नज़र आते है। अगर आप किसी समूह में स्थापित हो चुके हैं, तो कुछ समय के लिए उससे दूर रहें। आपके अनुपस्थित रहने पर आपके बारे में ज़्यादा बातें होंगी और आपकी ज़्यादा तारीफ़ भी होगी। आपको बस यह सीख लेना चाहिए कि दूर कब रहना है। अभाव से हर चीज़ का मूल्य बढ़ जाता है; इस सिद्धांत का लाभ लें।

नियम 17

दूसरों को दुविधा में रखें : अनिश्चय का माहौल बनाएँ

इंसान आदतों के हिसाब से चलते हैं। उनके मन में इस बात की गहरी चाहत होती है कि दूसरों के काम उन्हें परिचित लगें। आपके लीक पर चलते रहने से उन्हें यह एहसास होता है कि वे नियंत्रण में हैं। पाँसों को पलट दें जान-बूझकर अनपेक्षित काम करें। अगर आपके व्यवहार में कोई निरंतरता, तारतम्य या उद्देश्य नहीं दिखेगा, तो उनका संतुलन गड़बड़ा जाएगा और वे आपके क़दमों का मतलब समझने की कोशिश में थककर चूर हो जाएँगे। बहुत अंत तक ले जाने पर यह रणनीति आतंक उत्पन्न कर सकती है।

नियम 18

अपनी सुरक्षा के लिए किले न बनाएँ - एकाकीपन ख़तरनाक है

दुनिया ख़तरनाक है और दुश्मन हर जगह हैं हर एक को अपनी रक्षा करनी पड़ती है। किला सबसे सुरक्षित नज़र आता है। लेकिन किले में अलग-अलग रहना आपको जितने ख़तरों से बचाता है, उससे ज़्यादा ख़तरों को उत्पन्न करता है यह आप तक बहुमूल्य जानकारी नहीं पहुँचने देता, यह आपको सबकी नज़रों में लाता है और नतीजा यह होता है कि आप आसान निशाना लक्ष्य बन जाते हैं। बेहतर होगा कि लोगों से मिलें-जुलें, साथी खोजें, सबसे जुड़ें। भीड़ के कारण आप अपने शत्रुओं से सुरक्षित रहेंगे।

नियम 19

यह जानें कि आपके सामने कौन है - ग़लत व्यक्ति को नाराज़ न करें

दुनिया में कई तरह के लोग होते हैं। आपको यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि हर व्यक्ति आपकी रणनीतियों पर एक ही तरीके से प्रतिक्रिया करेगा। कुछ लोगों के साथ जब धोखा या चालबाज़ी की जाती है, तो वे बदला लेने की तलाश में अपनी बाक़ी की जिंदगी बिता देते हैं। वे भेड़ की खाल में भेड़िए होते हैं। अपने शिकारों और विरोधियों को सावधानी से चुनें, लेकिन कभी भी ग़लत व्यक्ति को धोखा न दें या उस पर हमला न करें।

नियम 20

किसी के पिट्टू न बनें

मूर्ख व्यक्ति ही हमेशा पिट्ठू बनने के लिए दौड़ लगाता है। खुद के अलावा किसी भी व्यक्ति के पाले में न जाएँ। अपनी स्वतंत्रता कायम रखकर आप दूसरों के स्वामी बन जाते हैं, उनमें मनमुटाव फैलाते है और उन्हें अपनी तरफ़ दौड़ाते हैं।

नियम 21

मूर्ख बनाने के लिए मूर्ख बनने का नाटक करें - सामने वाले से ज़्यादा मूर्ख दिखें

कोई भी यह पसंद नहीं करता कि वह सामने वाले से ज़्यादा मूर्ख दिखाई दें। बहरहाल, इस नीति का लाभ यह है कि इससे आपके शिकार खुद को आपसे ज़्यादा बुद्धिमान मान लेते हैं। जब उन्हें इस बात का विश्वास हो जाएगा, तो वे कभी यह शक नहीं करेंगे किं आप जैसे मूर्ख का कोई छिपा हुआ उद्देश्य भी हो सकता है।

नियम 22

समर्पण की चाल का प्रयोग करें: कमज़ोरी को शक्ति में बदलें

जब आप कमज़ोर हों, तो सम्मान के लिए कभी न लड़ें। इसके बजाय समर्पण करने का विकल्प चुनें। समर्पण से आपको दोबारा उठ खड़े होने का समय मिल जाता है। इससे आपको अपने विजेता शत्रु को सताने और परेशान करने का समय भी मिल जाता है। इससे आपको उसकी शक्ति के घटने का इंतज़ार करने का समय मिल जाता है। उसे युद्ध में जीतने न दें - इससे पहले ही उसके सामने समर्पण कर दें। दूसरा गाल आगे करके आप उसे परेशान विचलित कर देते हैं। समर्पण का प्रयोग शक्ति के औज़ार के तर में करें।

नियम 23

अपनी शक्तियों को केंद्रित करें

अपनी शक्तियों और ऊर्जा को सबसे मज़बूत बिंदु पर केंद्रित करें। बहुत सी खानों को थोड़ा-थोड़ा खोदने की कोशिश करने के बजाय एक ही समृद्ध खान को गहराई तक खोदने से ज़्यादा फ़ायदा है। केंद्रित प्रयासों की जीत होती है और निखरे हुए प्रयासों की हार होती है। अपनी प्रगति के लिए शक्ति के स्रोतों की तलाश करते समय एक मुख्य संरक्षक खोजें ऐसी मोटी गाय, जो आपको लंबे समय तक दूध देती रहे।

नियम 24

आदर्श दरबारी की भूमिका निभाएँ

आदर्श दरबारी एक ऐसे संसार में प्रगति करता है, जहाँ हर चीज़ शक्ति और राजनीतिक कौशल के इर्द-गिर्द घूमती है। उसने परोक्षता की कला में महारत हासिल कर ली है। वह चापलूसी करता है, श्रेष्ठ लोगों के सामने झुकता है और बाक़ियों पर अपनी शक्ति का प्रयोग बहुत ही अप्रत्यक्ष और शालीन अंदाज़ में करता है। दरबारी बनने के नियम सीखें और उनका इस्तेमाल करें। इसके बाद आप दरबार में कितनी ऊँचाई तक पहुँचेंगे, इसकी कोई सीमा नहीं है।

नियम 25

ख़ुद को नए साँचे में ढालें

समाज द्वारा लादी गई भूमिकाओं को स्वीकार न करें। एक नई पहचान बनाकर ख़ुद को नए साँचे में ढालें। अपनी एक ऐसी पहचान बनाएँ, जिसकी तरफ़ लोगों का ध्यान जाए और वे आपसे कभी न ऊबें। दूसरों की बनाई छवि के हिसाब से जीने से बेहतर यह है कि आप अपनी छवि ख़ुद बनाएँ। अपने सार्वजनिक कार्यों और मुद्राओं में नाटकीय तरीकों का प्रयोग करें इससे आपकी शक्ति बढ़ेगी और आपका क़द ज़िंदगी से बड़ा नज़र आएगा।

नियम 26

अपने हाथ साफ़ रखें

आपको कार्यकुशलता और शिष्टता की मूर्ति दिखना चाहिए। आपके हाथ कभी ग़लतियों और बुरे कामों से सने नहीं दिखने चाहिए। अपने हाथ साफ़ रखने के लिए दूसरों का प्यादों की तरह इस्तेमाल करें और ख़ुद को बेदाग़ रखें।

नियम 27

अनुयायी बनाने के लिए लोगों के विश्वास का लाभ उठाएँ

लोगों की प्रबल इच्छा होती है कि किसी चीज़ में विश्वास करें। उन्हें अनुसरण करने के लिए कोई नया उद्देश्य या नई आस्था देकर इस इच्छा का लाभ उठाएँ। अपने शब्दों को अस्पष्ट लेकिन सुनहरी संभावनाओं से भरपूर रखें। तर्क और स्पष्ट चिंतन के बजाय उत्साह पर ज़ोर दें। अपने नए अनुयायियों को कर्मकांड की कुछ परंपराएँ दें। उन्हें अपने लिए त्याग करने को कहें। संगठित धर्म और महान उद्देश्यों के अभाव में आपका नया आस्था तंत्र आपको असीमित शक्ति प्रदान करेगा।

नियम 28

बहादुरी के साथ काम करने उतरें

अगर आपको किसी काम में सफलता मिलने का यक़ीन नहीं है, तो उसे करने की कोशिश न करें। आपकी शंका और हिचक इसकी सफलता में बाधा डालेंगी। संकोच ख़तरनाक है। बेहतर यह है कि बहादूरी से मैदान में उतरा जाए। साहसिक गलतियों को ज़्यादा साहस दिखाकर सुधारा जा सकता है। हर व्यक्ति बहादुर व्यक्ति की प्रशंसा करता है। कोई भी कायर का सम्मान नहीं करता है।

नियम 29

अंत तक पूरी योजना बनाएँ

अंत ही सब कुछ है। अंत तक पहुँचने की पूरी योजना बनाएँ। उन सभी संभावित परिणामों, बाधाओं और क़िस्मत के उतार-चढ़ावों पर विचार करें, जो आपकी कड़ी मेहनत पर पानी फेर सकते हैं और उसका श्रेय दूसरों को दे सकते हैं। अंत तक की योजना बनाने से आप परिस्थितियों के शिकार नहीं होंगे और यह जान जाएँगे कि कब रुकना है। क़िस्मत को धीरे से राह दिखाएँ और बहुत आगे तक विचार करके अपने भविष्य को तय करें।

नियम 30

अपनी उपलब्धियों को आसान दिखाएँ

आपके काम सहज नज़र आने चाहिए, जैसे आपने उन्हें आसानी से कर दिया हो। आपके काम में जितनी मेहनत, कोशिश और चतुर चालें लगी हैं, उन्हें छिपाया जाना चाहिए। जब ऐसा लगता है कि आपने बिना ख़ास कोशिश के काम कर दिया है, तो यह छवि बनती है कि आप अगर कोशिश करें, तो बहुत ज़्यादा काम कर सकते हैं। आप कितनी कड़ी मेहनत करते हैं, यह बताने के प्रलोभन से बचें, क्योंकि इससे सिर्फ़ सवाल उठते हैं। किसी को भी अपनी चालें न सिखाएँ, वरना उनका प्रयोग आप ही के ख़िलाफ़ किया जाएगा।

नियम 31

विकल्पों पर नियंत्रण करें : दूसरों को ताश के उन पत्तों से खिलाएँ, जो आपने बाँटे हैं

सर्वश्रेष्ठ धोखा वह होता है, जिसमें आप सामने वाले को विकल्प देते हैं। इससे आपके शिकार को यह लगता है कि नियंत्रण उसके हाथ में है, जबकि वह दरअसल आपके हाथों की कठपुतली होता है। लोगों को ऐसे विकल्प दें, ताकि उनके द्वारा कोई सा भी विकल्प चुनने पर आपको लाभ हो। उन्हें दो बुराइयों में से कम बुरी बात को चुनने के लिए विवश करें, जबकि दोनों ही बातें आपके उद्देश्य को पूरा करें। उन्हें दुविधा के सींगों पर बैठा दें: जिधर मुड़ें, उन्हें घायल होना ही है।

नियम 32

लोगों की फ़ंतासियों के साथ खेलें

सच्चाई से लोग अक्सर बचते हैं क्योंकि यह बदसूरत और अप्रिय होती है। सच्चाई और यथार्थ का आग्रह कभी न करें, जब तक कि आप उस क्रोध के लिए तैयार न हों, जो विरक्ति से उत्पन्न होता है। ज़िंदगी इतनी कठोर और दुखद है कि जो लोग रोमांस निर्मित सकते हैं या फंतासी (Fantasy) की उड़ान भर सकते हैं, वे रेगिस्तान में नख़लिस्तान की तरह हैं हर व्यक्ति उनकी तरफ भागेगा। लोगों की फ़ंतासियों का दोहन करने में प्रबल शक्ति होती है।

नियम 33

हर व्यक्ति की कमज़ोर नस पहचानें

हर व्यक्ति की एक न एक कमज़ोरी होती है, हर महल की दीवार में एक न एक छेद होता है। यह कमज़ोरी आम तौर पर कोई असुरक्षा कोई अनियंत्रित भाव या आवश्यकता होती है। यह कोई छोटा रहस्यमय सुख भी हो सकता है। चाहे यह जो भी हो, एक बार मिल जाने पर आप इस कमज़ोर नस का इस्तेमाल अपने लाभ के लिए कर सकते हैं।

नियम 34

शहंशाहों की तरह रहें : सम्राट जैसा सम्मान पाने के लिए सम्राट की तरह काम करें

आप जिस तरह से खुद को पेश करते हैं, उसी से अक्सर यह तय होता है कि लोग आपके साथ कैसा व्यवहार करेंगे। घटिया या साधारण दिखने पर लोग आपका सम्मान हर्गिज़ नहीं करेंगे। चूंकि सम्राट खुद अपना सम्मान करता है, इसलिए दूसरों को भी उसका सम्मान करने की प्रेरणा मिलती है। शहंशाहों की तरह व्यवहार करके और अपनी शक्तियों में विश्वास दिखाकर आप स्वयं को मुकुट पहनने की दिशा में ले जाते हैं।

नियम 35

टाइमिंग की कला में माहिर बनें

कभी जल्दबाज़ी में न देखें। जल्दबाज़ी से ऐसा लगता है, जैसे आपका खुद पर और समय पर नियंत्रण नहीं है। हमेशा धैर्यवान नज़र आएँ, जैसे आपको यह विश्वास हो कि आख़िरकार आप सफल होंगे। सही पल को खोजें। समय की आत्मा को परखें। उन प्रवृत्तियों को समझ लें, जो आपको शक्तिशाली बनाएँगी। अगर समय अभी अनुकूल नहीं है, तो मैं पीछे रहूँगा, लेकिन अनुकूल समय आने पर मैं कसकर वार करूँगा।

नियम 36

जो चीजें आप पा न सकें, उनका तिरस्कार करें : उन्हें नज़रअंदाज़ करना ही सर्वश्रेष्ठ प्रतिशोध है

किसी छोटी समस्या को स्वीकार करके आप उसे शक्ति प्रदान करते हैं। आप किसी दुश्मन पर जितना ज़्यादा ध्यान देते हैं, आप उसे उतना ही ज़्यादा शक्तिशाली बना देते हैं। और जब आप किसी ग़लती को ठीक करने की कोशिश करते हैं, तो छोटी सी ग़लती भी अक्सर ज़्यादा बुरी और स्पष्ट दिखती है। कई बार चीज़ों को उनके हाल पर छोड़ देना ही सबसे अच्छा होता है। अगर आप कोई चीज़ चाहते तो हैं, लेकिन उसे पा नहीं सकते, तो उसका तिरस्कार करें। आप जितनी कम रुचि दिखाएंगे, आप उतने ही ज़्यादा श्रेष्ठ देखेंगे।

नियम 37

चकाचौंध का आभामंडल बनाएँ

प्रबल छवि और प्रतीकात्मक मुद्राएँ शक्ति का आभामंडल बनाती हैं - सब उन पर प्रतिक्रिया करते हैं। अपने आस-पास के लोगों के सामने नाटक करें। इस नाटक में रोचक तस्वीरें और चमकते प्रतीक भी होने चाहिए, जो आपकी उपस्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हों। दिखावे की चकाचौंध में कोई भी इस तरफ़ ध्यान नहीं देगा कि आप दरअसल क्या कर रहे हैं।

नियम 38

जैसा चाहे सोचें, व्यवहार सबके जैसा करें

अगर आप समय के ख़िलाफ़ चलते नज़र आएँगे, अगर आप अपारंपरिक विचारों और अप्रचलित तौर-तरीक़ों को प्रदर्शित करेंगे, तो लोग सोचेंगे कि आप सिर्फ़ उनका ध्यान खींचना चाहते हैं, इसलिए वे आपको हिक़ारत से देखेंगे। चूँकि आपने उन्हें हीन महसूस कराया है, इसलिए वे आपको दंड देने का रास्ता खोज लेंगे यह ज़्यादा सुरक्षित है कि आप सबके साथ घुल-मिल जाएँ और सामान्य दिखने का अभ्यास करें। अपने मौलिक विचार सिर्फ़ सहिष्णु मित्रों या उन्हीं को बताएँ, जिन पर आप भरोसा हो कि वे आपके अनूठेपन की कद्र करेंगे।

नियम 39

मछली पकड़ने के लिए पानी हिलाएँ

क्रोध और भावनाएँ रणनीति की दृष्टि से नुक़सान पहुँचाती हैं। आपको हमेशा शांत और उद्देश्य पर केंद्रित रहना चाहिए। स्वयं शांत रहते हुए अगर आप अपने शत्रुओं को गुस्सा दिला सकें, तो आपको निश्चित रूप से लाभ होता है। अपने शत्रुओं को असंतुलित कर दें। उनके दंभ में कोई दरार खोजें, जिसके द्वारा आप उन्हें हिला सकें। अगर आप ऐसा करेंगे, तो उनकी बागडोर आपके हाथ में होगी।

नियम 40

मुफ़्त लंच का तिरस्कार करें

मुफ़्त में मिली चीज़ ख़तरनाक होती है। आम तौर पर इसमें कोई चाल या एहसान छिपा होता है। जिस वस्तु का कोई मूल्य होता है, वह क़ीमत चुकाने लायक होती है। जब आप क़ीमत चुकाते हैं, तो आप कृतज्ञता, अपराधबोध और धोखे से बचे रहते हैं। अक्सर पूरी क़ीमत चुकाने में ही समझदारी होती है उत्कृष्टता के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए। अपने धन को उदारता से ख़र्च करें और इसे प्रवाहित होने दें। उदारता शक्ति की निशानी है और इसे खींचने वाला चुंबक भी है।

नियम 41

महान व्यक्ति का अनुसरण न करें

जो पहली बार होता है, वह हमेशा बाद में होने वाले से ज़्यादा अच्छा और मौलिक दिखता है। अगर आप किसी महान व्यक्ति के उत्तराधिकार या किसी मशहूर पिता कि संतान हैं, तो आपको उनसे ज़्यादा चमकने के लिए उनसे दोगुनी उपलब्धियाँ हासिल करनी होगी। कहीं आप उनकी छाया में खोकर न रह जाएँ या ऐसे अतीत में उलझकर न रह जाएँ, जिसका निर्माण आपने नहीं किया है। राह बदलकर अपनी पहचान और अपना खुद का नाम स्थापित करें। दबंग पिता के चंगुल से बाहर निकलें, उसकी विरासत की उपेक्षा करें और अपने तरीक़े से चमककर शक्ति हासिल करें।

नियम 42

गड़रिए को मार दें, भेड़ें तितर-बितर हो जाएँगी

मुश्किलें अक्सर किसी एक प्रबल व्यक्ति की वजह से पैदा होती हैं- जो दंभी और महत्वाकांक्षी होता है, जो आंदोलन करता है और सद्भावना में ज़हर भर देता है। अगर आप ऐसे लोगों को सक्रिय होने की जगह देते हैं, तो दूसरे उनके प्रभाव के प्रलोभन में आ जाएँगे। उनके द्वारा उत्पन्न मुश्किलों के कई गुना बढ़ने का इंतज़ार न करें। उनके साथ विचार-विमर्श करने की कोशिश न करें। वे कभी नहीं सुधर सकते। उन्हें अलग-थलग करके या देश से बाहर निकालकर देशनिकाला देकर उनके प्रभाव को ख़त्म कर दें। मुश्किल की जड़ यानी गड़रिए पर प्रहार करेंगे, तो भेड़ें अपने आप तितर-बितर हो जाएँगी।

नियम 43

दूसरों के दिल और दिमाग़ पर काम करें

बलपूर्वक दमन करने से एक प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है, जो अंततः आपके ख़िलाफ़ काम करती है। आपको दूसरों को इस तरह प्रेरित करना चाहिए, ताकि वे ख़ुशी-खुशी आपकी बताई दिशा में चल पड़ें। जिस व्यक्ति को आप इस तरह से फँसा लेते हैं, वह आपका वफ़ादार प्यादा बन जाता है। दूसरों को फँसाने का तरीक़ा उनके व्यक्तिगत मनोविज्ञान और कमज़ोरियों से लाभ लेना है। उसके प्रतिरोध को नर्म करने के लिए उनकी भावनाओं पर काम करें, उनकी प्रिय चीज़ों का वायदा करें और जिनसे वे डरते हों, उनके बारे में आश्वस्त करें। अगर आप दूसरों के दिलोदिमाग़ को नज़रअंदाज़ करेंगे, तो वे आपसे नफ़रत करने लगेंगे।

नियम 44

दर्पण देखकर निरस्त्र और क्रोधित करें

दर्पण सच्चाई का प्रतिबिंब दिखाता है, लेकिन यह धोखे का आदर्श हथियार भी हो सकता है। जब आप अपने शत्रुओं का प्रतिबिंब बन जाते हैं, जब आप उन्हीं की नक़ल करते हैं, तो वे आपकी रणनीति का अनुमान नहीं लगा सकते। नक़ल से वे चिढ़ जाते हैं और अपमानित महसूस करते हैं, जिससे वे अति-प्रतिक्रिया कर बैठते हैं। उनका प्रतिबिंब सामने रखकर आप उन्हें बतलाते हैं कि आपमें भी उन्हीं जैसे जीवनमूल्य हैं। उनके कार्यों की नक़ल करके आप उन्हें सबक़ सिखाते हैं। बहुत कम लोग नक़ल प्रभाव की शक्ति का प्रतिरोध कर पाते हैं।

नियम 45

परिवर्तन की आवश्यकता का भाषण दें, लेकिन एकदम बहुत ज़्यादा सुधार कभी न करें

हर व्यक्ति मानसिक रूप से परिवर्तन की ज़रूरत समझता है, लेकिन दिन-प्रतिदिन के स्तर पर लोग आदतों के हिसाब से चलते हैं। बहुत ज़्यादा प्रयोगशीलता से परेशानी पैदा हो जाती है और विद्रोह की नौबत भी आ सकती है। अगर आप शक्ति के किसी पद पर नए हो या बाहरी व्यक्ति के रूप में शक्ति की नींव बनाने की कोशिश कर रहे हों, तो पुराने तरीक़ों का सम्मान करने का ढोंग करें। अगर परिवर्तन आवश्यक हो, तो ऐसा जताएँ, जैसे परंपरा में सिर्फ़ थोड़ा-सा ही सुधार किया जा रहा है।

नियम 46

बहुत आदर्श नज़र न आएँ

दूसरों से बेहतर नज़र आना हमेशा ख़तरनाक होता है, लेकिन सबसे ख़तरनाक यह है कि आपमें एक भी ग़लती या कमज़ोरी नज़र न आए। ईर्ष्या गोपनीय शत्रु पैदा करती है। कभी-कभार दोषों का प्रदर्शन करना या हानिरहित कमज़ोरियों को स्वीकार करना ज़्यादा समझदारी भरा तरीक़ा है, ताकि ईर्ष्या उत्पन्न न हो और आप ज़्यादा मानवीय नज़र आएँ। सिर्फ़ ईश्वर और मुर्दा लोग ही बिना किसी भय के डरे आदर्श दिख सकते हैं।

नियम 47

लक्ष्य से आगे न जाएँ, सीखें कि जीतने के बाद कहाँ रुकना है

विजय का पल अक्सर सबसे ख़तरनाक पल होता है। विजय की गर्मी में दंभ और अति आत्मविश्वास आपको उस लक्ष्य से आगे धकेल सकता है, जिस पर आपने निशाना लगाया था। आप जितने शत्रुओं को पराजित करते हैं, ज़्यादा आगे निकलने के चक्कर में उससे ज़्यादा शत्रु बना लेते हैं। सफलता को अपने दिमाग पर न चढ़ने दें। रणनीति और सुनियोजित योजना का कोई विकल्प नहीं है। लक्ष्य तय करें और उस तक पहुँचने के बाद रुक जाएँ।

नियम 48

निराकार बनें

दिखने वाली योजना बनाकर आप ख़ुद को हमले का निशाना बना लेते हैं। साकार बनकर खुद को शत्रु की पकड़ में रखने लाने के बजाय ख़ुद को लगातार ढालते रहें। इस सच्चाई को स्वीकार करें कि कुछ भी निश्चित नहीं है और कोई नियम तय नहीं है। अपने को बचाने का सर्वश्रेष्ठ तरीक़ा पानी की तरह द्रव और निराकार होना है। स्थिरता या स्थायी व्यवस्था पर भरोसा न करें। हर चीज़ बदलती है।



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